Monday, 29 June 2009

वो बारिश के बूंदों के आते ही .गर्मी में राहत मिलना। वो मिटटी में पानी के मिलते ही भीनी सी खुशबु आना। वो रास्तो के खड्डो में पानी का जमा हो जाना थोडी ज्यादा बारिश आते ही वो रास्तो का डूब जाना वो रेल सेवा ओ पे असर वो आम आदमी की स्लो ज़िन्दगी वो हर ज्यादा बारिश में दिलो में डर बाढ़ का । बारिश का मज़ा न लेके भागते हुए लोग डर के मारे कांपते हुए लोग । वो हर बारिश में लाइट और फ़ोन का बंध हो जाना । और थोडी बारिश भी जो पुरी दुनिया के लिए मज़ा है वो यहाँ के लोगो के लिए सज़ा बन जाना
यही है मुंबई मेरी जान
शरद आचार्य

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