Thursday, 25 June 2009
वो आए थे हमारे जहा में बहार बन के । सोचा था यहाँ विराना कभी न होगा .....खिल उठे थे फूल जेसे इस दिल के बाग़ में वो लगते थे जेसे खुशबू इस बाग़ के .... जब से गए है वो इस जिंदगी से हमे छोड़ के ..... बसा है इस बाग़ में विराना तब से ... उम्मीद में है किसी और बहार का इस वीराने में ......काश कोई आके खिलाये बाग़ मेरे दिल का ..........
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